इतिहास के परिप्रेक्ष्य में हमारा समाज एवं हमारा दायित्व

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लेखक -प्राचार्य ओ.सी.पटले संशाेधक इतिहासकार

हमारे पँवार वैनगंगा तटीय पँवार / पाेवार कहलाते है और इसमें 36 कुर के पँवार समाविष्ट है I हमारे पूर्वज 300वर्ष पहले, सत्रहवीं सदी के उत्तरार्ध में मालवा से नगरधन आये और इस प्रदेश के समकालीन शासकाें के साथ अच्छे संबंध प्रस्थापित करते हुये, वैनगंगा घाटी के उपजाऊ क्षेत्र में स्थायी रुप से बस गये I.. हमारे पूर्वजाें ने तब से अबतक के प्रदीर्घ काल तक अपनी पाेवारी बाेली और पाेवारी संस्कृति का जतन किया और उसे अधिक समृद्ध किया I इसके साथ ही साथ उन्हाेंने अपने नाम / पहचान, पँवार /पाेवार काे भी बचाये रखा I
हमारे समाज का नाम, हमारी बाेली और हमारी संस्कृति यह हमारी अनमाेल सांस्कृतिक एवं बाैद्धिक धराेहर है I अब हमारा दायित्व है कि पूर्वजाें से प्राप्त इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत काे संरक्षित, संवर्धित एवं समृद्घ कर के अपनी नई पीढ़ी के हाथाें में साैंपे I यही हमारा परम पावन पैतृक अथवा सामाजिक ॠण है I इससे उऋण हाेना यह हमारा कर्तव्य है। 
    हमारे उपर्युक्त सामाजिक दायित्व के निर्वाह में हमारे राष्ट्रीय एवं अन्य स्तर के सामाजिक संगठनों ने सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए I हमारे राष्ट्रीय संगठन की स्थापना इ. स. 1904 में हुयी I राष्ट्रीय संगठन ने तब से अबतक समाजहित में अनेक अच्छे कार्य किये I परन्तु राष्ट्रीय महासभा ने अपनी स्थापना के लगभग साै वर्ष पश्चात इ. स. 2003-04 में अपने नाम में से "पँवार "शब्द काे हटाकर उसके स्थान पर "पवार " यह शब्द अंकित कर दियाI राष्ट्रीय महासभा द्वारा अपने नाम में किए गए परिवर्तन पर हमारे प्रमुख आक्षेप एवं आलाेचना निम्नलिखित हैं -

1. पँवार / पाेवार यह हमारा ऐतिहासिक एवं परम्परागत नाम है I पवार यह नाम भाेयर पवार तथा मराठा पवार वापरते है I यह वास्तविकता हाेते हुये "पँवार "नाम हटाकर वहाँ "पवार " नाम नमूद करना यह कदापि न्यायसंगत नहीं है I इससे 36 कुर वाले पँवाराें की भावना एवं अस्मिता काे ठेंच पहुँची हैंI स्वाभाविकत:उनमें इसके प्रति असंताेष व्याप्त है।

2. हमारे पूर्वजाें ने मालवा से आने के पश्चात 300वर्षाें तक अत्यंत संघर्षमय काल तथा युद्धजन्य परिस्थितियों में भी पँवार / पाेवार इस मूल नाम से अपनी सामाजिक पहचान बचाकर रखी और अब हमारा दायित्व है कि यही धराेहर हम अपनी नयी पीढी काे साैंपे I किन्तु राष्ट्रीय महासभा ने अपना नामांतर करके 36 कुर के पँवाराें काे दिग्भ्रमित कर दिया है एवं उनके कर्तव्य निर्वाह में भयंकर बाधा उत्पन्न करके रख दी है I

3. राष्ट्रीय महासभा अथवा हमारे कर्णधाराें ने केवल महासभा का नाम ही नहीं बदला है, बल्कि उन्हाेंने एक की पुस्तक में पाेवारी भाषा और भाेयरी भाषा का लेखन कार्य प्रारंभ कर इन दाेनाें भाषाओं एवं संस्कृति का एक दूजे में विलय का अनुचित कार्य भी प्रारंभ कर दिया है I  इस विलिनीकरण की धुन में इन्हाेंने "पँवारी/पाेवारी भाषा " का नामकरण "पवारी भाषा "एवं "पँवारी /पाेवारी संस्कृति " का  नामकरण "पवारी संस्कृति "ऐसा भी कर डाला हैै I इससे प्रतीत हाेता है कि भाेयर पवार इस समाज के प्रति अतिरिक्त मानसिक माेह के कारण राष्ट्रीय महासभा यह भाषा एवं संस्कृति संवर्धन के मामले में राह भटक गयी है और इसके कारण पँवारी /पाेवारी भाषा का उत्थान यह पूर्णतः दुर्लक्षित, उपेक्षित और अवरुद्ध हाे गया I
उपर्युक्त अवस्था के विरोध में हमने व्यापक जनजागरण किया I हमारे विचाराें से प्रभावित बुद्धिजीवि-उर्जावान -समाजहितचिंतक युवाशक्ति ने इ. स. 2020 में "पाेवार इतिहास, साहित्य अना उत्कर्ष " इस ग्रुप -परिवार (WhatsApp Group) की स्थापना की और हुये विराेथ का वैचारिक प्रतिकार करते हुए पाेवारी भाषा, पाेवारी संस्कृति एवं पाेवार वंश के इतिहास काे संरक्षित, संवर्धित  करने का कार्य आश्चर्यजनक गति से प्रारंभ किया I इस ग्रुप -परिवार का यह कार्य यह एक युगांतरकारी घटना एवं कार्य साबित हाेवेगाI
सच पूछाें ताे प्रबुद्ध वर्ग के इस समूह ने 36कुर वाले पाेवार समाज की डूबती हुई भाषिक /सांस्कृतिक नैया काे बचा लिया है I
निष्कर्ष एवं सुझाव :-
1.हमारे समाज के महानुभावाें ने अपने समाज का नाम पँवार /पाेवार यही लिखना चाहिये और अपनी मायबाेली काे पँवारी /पाेवारी ऐसा ही संबोधित करना चाहिए I
2..हमारे 36 कुर वाले समाज ने अपनी मायबाेली और संस्कृति का संवर्धन नि:संकाेच स्वतंत्र रुप से ही करना चाहिए I
3.राष्ट्रीय महासभा के नाम में अंतर्निहित "पवार "यह शब्द हमारे समाज काे आज भी दिग्भ्रमित करता है और भविष्य में भी नयी पीढी काे सदैव संभ्रमित करते ही रहेगा I इस संभ्रमावस्था से समाज काे मुक्ति दिलाने के लिए एवं समाज काे संभावित हानि से बचाने के लिए राष्ट्रीय महासभा ने अपने नाम में पुनर्रसंशाेधन करके इस नाम काे अविलंब पूर्ववत करना चाहिए I




पँवारी भाषाविश्व  नवी क्रांति अभियान, भारतवर्ष. 
पँवार समाजविश्व आमूलाग्र क्रांति अभियान ,भारतवर्ष .
शनि. 06/06/2020.

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