केट क्लीयर करने पर ऐश्वर्या बिसेन अत्यधिक खुश हुई पर साक्षात्कार को लेकर अत्यधिक चिंतित भी रही।

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जीवन में सब कुछ महज संयोग नहीं होता अपितु इसके पीछे कड़े परिश्रम और प्रापर प्लानिंग की जरुरत होती है।

युवाओं को  संदेश- लक्ष्य निर्धारित कर उसके बारे में उचित विचार करें और सही दिशा में अपना अधिकतम श्रेष्ठ देने का प्रयास करें

बालाघाट। कक्षा 8 तक विवेक ज्योति ज्ञान पीठ बैहर, कक्षा 10 तक महर्षि विद्या मंदिर बालाघाट और कक्षा 12 तक श्री चैतन्य विशाखापत्तनम जैसे भारतीय संस्कृति और संस्कार से सराबोर संस्थानों से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करने वाली कु ऐश्वर्या बिसेन माधव इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस ग्वालियर से बीई है।


29 मई1997 को श्री अशोक बिसेन और श्रीमती लता बिसेन के घर जन्मी ऐश्वर्या को शिक्षा की महत्ता और केरियर के संबंध में उचित जानकारी और मार्गदर्शन  शिक्षा क्षेत्र से जुड़े पिता श्री अशोक बिसेन से प्राप्त होता रहा।


कु ऐश्वर्या बिसेन का प्रिय विषय सदैव गणित रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए हायर  सेकेंडरी में पीसीएम को प्राथमिकता दी गई। आपने जेईई-मेन क्लीयर किया जिसके आधार पर बीई में प्रवेश पाया।

आपके द्वारा नीट,मीट्स,केट,गेट जैसी  परीक्षाओं की तैयारी करने के स्थान पर बीई करने और उसके बाद मेनेजमेंट डिग्री करने 

को प्राथमिकता दी  गई और उसमें आप सफल भी रहीं। जहां चाह वहां राह की तर्ज पर आप आईआईएम रोहतक में प्रवेश हेतु पात्र भी हो गई। बीई के आधार पर आपने एक्सेंचर पुणे में अपनी सेवाएं भी दी।


केट क्लीयर करने पर आप अत्यधिक खुश भी हुई पर साक्षात्कार को लेकर अत्यधिक चिंता में भी रही क्योंकि केट का वेटेज महज 30 से 40 % ही रहता है शेष अंक साक्षात्कार, चयन प्रक्रिया और प्रोफाइल पर निर्भर करते हैं। इसीलिए आपने अपनी कम्पनी से एक माह का अवकाश लेकर तैयारी करना उचित समझा। इसी का परिणाम है कि कुमारी ऐश्वर्या बिसेन आईआईएम रोहतक हेतु चयनित हो सकी।


आपका मानना है कि जीवन में यह सब महज संयोग नहीं होता अपितु इसके पीछे कड़े परिश्रम और प्रापर प्लानिंग की जरुरत होती है।


युवाओं को आपका संदेश है कि अपना लक्ष्य निर्धारित करें ,उसके बारे में उचित विचार करें और सही दिशा में अपना अधिकतम श्रेष्ठ देने का प्रयास करें।


आप वित्त में एमबीए करके पीएचडी करना चाहती हैं। पर्याप्त ज्ञान और अर्थ उपार्जित करके आप देश और समाज के विकास के लिए वित्तीय नीतियों में सहायता करना चाहती है। आपका मानना है कि युवाओं में अंधराष्ट्रभक्ति के स्थान पर सच्ची राष्ट्रभक्ति  होनी चाहिए। सुखवाड़ा से अपने विचार साझा करते हुए आप आगे कहती हैं कि यदि मैं लोगों को सच्ची राष्ट्रभक्ति सिखा सकी तो  मेरी ओर से

यह देश की सच्ची सेवा होगी।


 *"सुखवाड़ा"* आपके राष्ट्रप्रेम को नमन् करते हुए आपके स्वस्थ, सुखी ,संपन्न और दीर्घायु जीवन की कामना करता है।

आपका *"सुखवाड़ा"* ई-दैनिक और मासिक भारत।

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