"बाटं देखकन" पर कविता लेखक(कवी):- मोतीलाल चौधरी जी की

Total Views : 1,146
Zoom In Zoom Out Read Later Print

"बाटं देखकन" पर कविता लेखक(कवी):- मोतीलाल चौधरी जी की

"बाटं देखकन"


बाटं देखकन, मी वो थकेवं
कल्पतरू को ,संग जगेवं.!!१!!

कसी  होतीस ? काय होतीस ?
कोमल चैतन्य, अबोल होतीस.
यादमा तोरो,मी वो रंगेवं,
कल्पतरू को,संग जगेवं..!!२!!

तोरो बखान, कसो करू मी,
तोरो सपनमा, मगन भयेव मी. 
तोरो संग मी,घरं खेलेव,
कल्पतरू को,संग जगेवं.!!३!!

कबं आवजो? काजग बोलजो?
कबं गरोला ,मिठी मारजो ?
तोरो पिरम मा, मी धुंद भयेवं
कल्पतरू को, संग जगेवं.!!४!!

कसो सांगू मी, कसो जिवुसु मी?
तिनो पहरला, बाट देख्सू मी.
खुला डोरा लकं, सपना देखेवं
कल्पतरू को ,संग जगेवं.!!५!!

तोरो बोलनो, तोरो चलनो,
 फुलं सारखो, मंद हासनो.
तोरो पिरम मा,पागल भयेवं
कल्पतरू को, संग जगेवं.!!६!!

********************************
 कवी:- *मोतीलाल चौधरी 
मनीष नगर, नागपूर* (माय असेट इन्फ्रा) 
लिखान:- भंडारा रेलवे स्टेशन(१९९९)
मराठी अनुवाद:- जानेवारी २०१९
*********

See More

Latest Photos